Arunay
An Abstract & Contemporary Hindi Poetry

तेरे शहर की भीड़ अब मुझे बिल्कुल नही सुहाति है,
जब भी
तन्हा होता हूँ, मेरे गाँव की याद आती है।

पहचान तो बहुत है मेरी शहर में, ये रिश्ते, ये संबंध रिझाते भी हैं,
पर जब भी तन्हा होता हूँ कही दूर से आवाज़ आती है,
कि अब मुझे तेरे शहर की भीड़ बिल्कुल नही सुहाति है।

समंदर में हाथ डालकर, मोतीयों की चाह ... Read more »

Views: 459 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-16 | Comments (0)

एक सुबह,
दो जीवन,
तीन बचपन,
चार जवानी,
पाँच बंधन,
छह संघर्ष,
सात अनुभव,
आठ स्रजन,
नव विसर्जन,
फिर एक शाम, सुबह के नाम।

Views: 392 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-11 | Comments (0)

खुशी और गम मे हम आँखो से निकल आएँगे,
एक दोस्त की ही तरह साथ हम निभाएँगे।
रखें याद जब तलक आपकी मर्ज़ी,
हम हमेशा इसी तरह से गुनगुनाएँगे।
आप गुस्से मे रहें जब भी कभी और कहीं,
आँखो मे पहले हम ही तो उतर आएँगे।
हसेंगे आप जब कभी भी खिलखिलते हुए,
आँखो में हम चमक के साथ झिलमिलाएँगे।
जब कभी होंगे अकेले मे गमगीन ज़रा, 
छ्लक के आँखो से नमकीन स्वाद लाएँगे।
लाख कोशिश भी कीजिएगा मन को बहलाने की,
साथ हम हैं ये अहसास भुला ना पाएँगे।
खुश रहें आप अरुण,हो ना हमारी भी कमी,
हम तो आँखो मे हैं जब चाह ... Read more »

Views: 408 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-11 | Comments (0)

बात रोटी की नही, बात भूख की हो
बात पानी की नही, बात प्यास की हो
बात हवा की नही, बात स्वांस की हो
बात अंधेरे की नही, बात प्रकाश की हो
बात नफ़रत की नही, बात प्यार की हो
बात जीवन की हो, बात विश्वास की हो 

बात हार की नही, बात जीत की हो
बात हाथ की नही, बात साथ की हो
बात आन की नही, बात दान की हो
बात समास्या की ... Read more »

Views: 447 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-09 | Comments (0)

सपनो के लिए ज़रूरी है आसमान मे उड़ना,
सपनो के लिए ज़रूरी है ज़मीन का बिछौना,
सपनो के लिए ज़रूरी है नींद मे सोना,
सपनो के लिए ज़रूरी है कुछ पाना और खोना
पर जीवन के लिए ज़रूरी है हमारा एक सपना,
इसके लिए ज़रूरी है जीवन जो हो अपना.
क्या सपनो के लिए ज़रूरी है समंदर की लहरें,
क्या सपनो के लिए ज़रूरी है पर्वतों के पहरे,
क्या सपनो के लिए ज़रूरी है फूल और खुशहाली ... Read more »

Views: 389 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-09 | Comments (1)

थक कर तू रुक मत,
अभी कई मुकाम बाकी हैं।
सारी ज़मीन चुक गई,
अभी आसमान बाकी है।
छाया देख तू बैठ मत,
अभी और उड़ान बाकी है। 
सारी ज़मीन उठ गई,
अभी आसमान बाकी है।
रात देख तू सो मत,
अभी विहान बाकी है।
सारी ज़मीन जाग गई, 
अभी आसमान बाकी है।
वादों पर तू झुक मत,
अभी इम्तहान बाकी है।
सारी ज़मीन जीत ली,
अभी आसम ... Read more »

Views: 452 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-09 | Comments (0)

आओ चलें दूर कहीं जंगल की ओर,
देखेंगे गेहूँ की बाली और आमों पर बोर।
सूरज दिखलने लगा अपना अब ज़ोर,
जंगल में लेता है पतझड़ हिल्लोर।
आओ चलें दूर कहीं जंगल की ओर। 
पलाश पर दिखती है किंशुक की कोर,
रक्तपुष्प, वाकरपुष्प,टेशु हैं चारून ओर।
आओ चलें दूर कहीं जंगल की ओर।
फूलों पर आज कल है भौरों का तौर,
मधु भी है मस्ती भी ,और मौजें बतौर।
आओ चलें द ... Read more »

Views: 379 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-09 | Comments (0)

जीवन एक अनुबंध है,
सामाजिक प्रतिबंध है,
एक परस्पर संबंध है,
मान्यताओं मे बंद है,
धर्म कर्म मे द्वंद है,
यही तो अंतर्द्वंद है,
जीवन एक निबंध है.
या फिर यह एक छ्न्द है,
कभी कभी तो मतन्ग है,
विरक्त हुआ तो मलंग है,
यानी जीवन तो स्वच्छन्द है,
ईश्वर का एक प्रयोग है,
अपना भी सहयोग है,
जीवन तो आनंद है ... Read more »

Views: 390 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-08 | Comments (0)

शब्दों के इस आडंबर को भाषा का श्रंगार न मानो , तो फ़िर बात करुं मै तुमसे
दिल से निकले उदगारों को एक अद्द्द उद्द्गार न मानो , तो फ़िर बात करुं मै तुमसे
निराकार की बातों का तुम अगर कोई आकार न मानो, तो फ़िर बात करुं मैं तुमसे
बातों को बस बातों में ही यूही गर साकार मान लो , तो फ़िर बात करुं मै तुमसे

Views: 423 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-08 | Comments (0)