Arunay
An Abstract & Contemporary Hindi Poetry
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बात रोटी की नही, बात भूख की हो
बात पानी की नही, बात प्यास की हो
बात हवा की नही, बात स्वांस की हो
बात अंधेरे की नही, बात प्रकाश की हो
बात नफ़रत की नही, बात प्यार की हो
बात जीवन की हो, बात विश्वास की हो 

बात हार की नही, बात जीत की हो
बात हाथ की नही, बात साथ की हो
बात आन की नही, बात दान की हो
बात समास्या की ... Read more »

Views: 552 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-09 | Comments (0)

सपनो के लिए ज़रूरी है आसमान मे उड़ना,
सपनो के लिए ज़रूरी है ज़मीन का बिछौना,
सपनो के लिए ज़रूरी है नींद मे सोना,
सपनो के लिए ज़रूरी है कुछ पाना और खोना
पर जीवन के लिए ज़रूरी है हमारा एक सपना,
इसके लिए ज़रूरी है जीवन जो हो अपना.
क्या सपनो के लिए ज़रूरी है समंदर की लहरें,
क्या सपनो के लिए ज़रूरी है पर्वतों के पहरे,
क्या सपनो के लिए ज़रूरी है फूल और खुशहाली ... Read more »

Views: 493 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-09 | Comments (1)

थक कर तू रुक मत,
अभी कई मुकाम बाकी हैं।
सारी ज़मीन चुक गई,
अभी आसमान बाकी है।
छाया देख तू बैठ मत,
अभी और उड़ान बाकी है। 
सारी ज़मीन उठ गई,
अभी आसमान बाकी है।
रात देख तू सो मत,
अभी विहान बाकी है।
सारी ज़मीन जाग गई, 
अभी आसमान बाकी है।
वादों पर तू झुक मत,
अभी इम्तहान बाकी है।
सारी ज़मीन जीत ली,
अभी आसम ... Read more »

Views: 545 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-09 | Comments (0)

आओ चलें दूर कहीं जंगल की ओर,
देखेंगे गेहूँ की बाली और आमों पर बोर।
सूरज दिखलने लगा अपना अब ज़ोर,
जंगल में लेता है पतझड़ हिल्लोर।
आओ चलें दूर कहीं जंगल की ओर। 
पलाश पर दिखती है किंशुक की कोर,
रक्तपुष्प, वाकरपुष्प,टेशु हैं चारून ओर।
आओ चलें दूर कहीं जंगल की ओर।
फूलों पर आज कल है भौरों का तौर,
मधु भी है मस्ती भी ,और मौजें बतौर।
आओ चलें द ... Read more »

Views: 467 | Added by: Arun_Tiwari | Date: 2016-02-09 | Comments (0)