Arunay
An Abstract & Contemporary Hindi Poetry
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0:08 AM
शब्द

शब्दों के इस आडंबर को भाषा का श्रंगार न मानो , तो फ़िर बात करुं मै तुमसे
दिल से निकले उदगारों को एक अद्द्द उद्द्गार न मानो , तो फ़िर बात करुं मै तुमसे
निराकार की बातों का तुम अगर कोई आकार न मानो, तो फ़िर बात करुं मैं तुमसे
बातों को बस बातों में ही यूही गर साकार मान लो , तो फ़िर बात करुं मै तुमसे

Views: 367 | Added by: Arun_Tiwari | Tags: hindi poem, Shabd | Rating: 5.0/1
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