Arunay
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7:14 PM
तेरे शहर की भीड़ अब मुझे बिल्कुल नही सुहाति है..!!

तेरे शहर की भीड़ अब मुझे बिल्कुल नही सुहाति है,
जब भी
तन्हा होता हूँ, मेरे गाँव की याद आती है।

पहचान तो बहुत है मेरी शहर में, ये रिश्ते, ये संबंध रिझाते भी हैं,
पर जब भी तन्हा होता हूँ कही दूर से आवाज़ आती है,
कि अब मुझे तेरे शहर की भीड़ बिल्कुल नही सुहाति है।

समंदर में हाथ डालकर, मोतीयों की चाह में, जब मुट्ठी बँध जाती है,
तो बस रेत हाथ आती है,तेरे शहर की भीड़ बिल्कुल नही सुहाति है।

कोहरे के पीछे, धुन्ध के उस पार, एक आकृति सी नज़र आती है,
दो कदम और बढ़ाकर देखूँ शायद, उस पार जिंदगी मुस्कुराती है,
तेरे शहर की भीड़ अब बिल्कुल नही सुहाति है।

Views: 588 | Added by: Arun_Tiwari | Tags: Tribute to Indian Martyrs, hindi poem | Rating: 5.0/1
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